आज ज्यादातर लोग तनावग्रस्त हैं. किसी को धन कमाने का तनाव है तो किसी को धन संभालने का तनाव है. किसी को बीमारी का तनाव है तो किसी को समय, विचारोंऔर समाज का. किसी को बीबी का तनाव है तो किसी को पति का, इस प्रकार अनेक संबंधों का तनाव इस संसार में दिखाई देता है. यह सब कारण बाहरी हैं परन्तु इनका परिणाम आपके अन्दर तनाव रूप में प्रकट होता है.
इसका हल जानने के लिए देखना होगा की तनाव का कारण क्या है?
तनाव का जो कारण है वह हमारे अन्दर है. हम अपने space (खाली स्थान)को सीमित कर लिया है सीमित करते जा रहे हैं. space जितना सीमित होगा हम उतने तनावग्रस्त होंगे और जितना विशाल होगा उतने मुक्त होंगे. यह space क्या है. तुमने बाहरी कूड़ा कचडा इतना भर लिया है कि space (खाली स्थान) सीमित हो गया है.
तुम सब कुछ अपने में चाहते हो, तुम अपने रखे नाम और और अपने बनाए रिश्तों में इतने उलझ गए हो कि उसके अलावा कुछ दिखाई ही नहीं देता. इसी ने तुम्हारे space को सीमित कर दिया है. तुम समय को भी पचा लेना चाहते हो. कभी सोचा क्या लेकर आये थे क्या लेकर जाओगे.
यह संसार है यहाँ भिन्न भिन्न प्रकृति के लोग हैं जो भिन्न भिन्न व्यवहार करेंगे. कोई जरूरी नहीं कि
तुम उनका जैसा व्यवहार करो और वह तुम्हारा जैसा व्यवहार करें. आइये प्रकृति से कुछ सीखें.
आप ने देखा होगा पशु कभी भी तनावग्रस्त नहीं होते क्योकि वह दूसरे से प्रतियोगिता नहीं करते . अच्छा बुरा जैसा भी स्वभाव हो अपने ही स्वभाव में रहते हैं. उनमें न संचय प्रवृत्ति है न खो जाने का डर है. न प्रतियोगिता है न समय की कमी. इसी प्रकार न संबंधों का तनाव है. न वो ऊल जलूल विचार पालते हैं.
मनुष्य पशुओं के स्वभाव से कुछ तो सीख सकता है. अब इसी क्रम में आज के तनाव के कारणों पर चर्चा करते हैं.
काम का तनाव - अधिक काम तनाव पैदा करता है. स्वभाव के विपरीत काम तनाव पैदा करता है. इसलिए कोई भी काम ईश्वर की सेवा भाव से करें.स्वभाव के विपरीत काम छोड़ दें.
समय का तनाव- भागने की आदत से बचें.जीवन चर्या एक घंटा पहले शुरू करें.
परिवार का तनाव-.यदि परिवार के सदस्य के व्यवहार से तनाव है, किसी मित्र ,साथी से तनाव है तो उसके कुछ कहने पर विवाद न करें. चुप होकर और आँख बंद कर उससे मन ही मन क्षमा मांगें. बार बार मन में दोहराएँ है महात्मन पूर्व जन्म के मेरे किसी अपराध के कारण आपका मेरे प्रति जो आचरण है उसके लिए मुझे क्षमा करें.
बीमारी का तनाव- स्वस्थ रहने का प्रयत्न करें फिर भी यदि लाइलाज बीमारी है या कमजोर शरीर है तो उसे अपना प्रारब्ध स्वीकार करते हुए प्रसन्नता से जीवन जियें. दूसरों के काम आयें. देह तो सभी के नष्ट होते हैं फिर बीमारी की क्या चिंता.
धन का तनाव- धन आवश्यक है पर धन के लिए पागलपन ठीक नहीं है. आपको जो मिलना है अवश्य मिलेगा. संयम से धन अर्जन करें. जीवन में आपके द्वारा कोई भी गलत कार्य अपने परिणाम भय से हमेशा आपको तनाव देगा.
विचारों का तनाव, प्रतियोगिता, सेवा में आगे आने की दोड़ भी तनाव के विशेष कारण है.
आप जितने ज्यादा पारिवारिक सामाजिक राजनेतिक सूचना से जुड़े होंगे आप उतने तनावग्रस्त होंगे. अतः अपनी सूचना को सीमित करें, अकारण चिंता को छोड़ें, ज्यादा प्रतियोगी न बने.जीवन और सेवा में आगे आने की दोड़ से बचें. यह समझ लें कि दुनिया आपके बिना भी चलेगी.
बोरियत से बचें और कोई ceatvity पालें. खेल, पशु-पक्षी पालन, सेवा कार्य और दूसरे की मदद तनाव दूर करता है.
जगत का अस्तित्व नहीं रहता.
इसका हल जानने के लिए देखना होगा की तनाव का कारण क्या है?
तनाव का जो कारण है वह हमारे अन्दर है. हम अपने space (खाली स्थान)को सीमित कर लिया है सीमित करते जा रहे हैं. space जितना सीमित होगा हम उतने तनावग्रस्त होंगे और जितना विशाल होगा उतने मुक्त होंगे. यह space क्या है. तुमने बाहरी कूड़ा कचडा इतना भर लिया है कि space (खाली स्थान) सीमित हो गया है.
तुम सब कुछ अपने में चाहते हो, तुम अपने रखे नाम और और अपने बनाए रिश्तों में इतने उलझ गए हो कि उसके अलावा कुछ दिखाई ही नहीं देता. इसी ने तुम्हारे space को सीमित कर दिया है. तुम समय को भी पचा लेना चाहते हो. कभी सोचा क्या लेकर आये थे क्या लेकर जाओगे.
यह संसार है यहाँ भिन्न भिन्न प्रकृति के लोग हैं जो भिन्न भिन्न व्यवहार करेंगे. कोई जरूरी नहीं कि
तुम उनका जैसा व्यवहार करो और वह तुम्हारा जैसा व्यवहार करें. आइये प्रकृति से कुछ सीखें.
आप ने देखा होगा पशु कभी भी तनावग्रस्त नहीं होते क्योकि वह दूसरे से प्रतियोगिता नहीं करते . अच्छा बुरा जैसा भी स्वभाव हो अपने ही स्वभाव में रहते हैं. उनमें न संचय प्रवृत्ति है न खो जाने का डर है. न प्रतियोगिता है न समय की कमी. इसी प्रकार न संबंधों का तनाव है. न वो ऊल जलूल विचार पालते हैं.
मनुष्य पशुओं के स्वभाव से कुछ तो सीख सकता है. अब इसी क्रम में आज के तनाव के कारणों पर चर्चा करते हैं.
काम का तनाव - अधिक काम तनाव पैदा करता है. स्वभाव के विपरीत काम तनाव पैदा करता है. इसलिए कोई भी काम ईश्वर की सेवा भाव से करें.स्वभाव के विपरीत काम छोड़ दें.
समय का तनाव- भागने की आदत से बचें.जीवन चर्या एक घंटा पहले शुरू करें.
परिवार का तनाव-.यदि परिवार के सदस्य के व्यवहार से तनाव है, किसी मित्र ,साथी से तनाव है तो उसके कुछ कहने पर विवाद न करें. चुप होकर और आँख बंद कर उससे मन ही मन क्षमा मांगें. बार बार मन में दोहराएँ है महात्मन पूर्व जन्म के मेरे किसी अपराध के कारण आपका मेरे प्रति जो आचरण है उसके लिए मुझे क्षमा करें.
बीमारी का तनाव- स्वस्थ रहने का प्रयत्न करें फिर भी यदि लाइलाज बीमारी है या कमजोर शरीर है तो उसे अपना प्रारब्ध स्वीकार करते हुए प्रसन्नता से जीवन जियें. दूसरों के काम आयें. देह तो सभी के नष्ट होते हैं फिर बीमारी की क्या चिंता.
धन का तनाव- धन आवश्यक है पर धन के लिए पागलपन ठीक नहीं है. आपको जो मिलना है अवश्य मिलेगा. संयम से धन अर्जन करें. जीवन में आपके द्वारा कोई भी गलत कार्य अपने परिणाम भय से हमेशा आपको तनाव देगा.
विचारों का तनाव, प्रतियोगिता, सेवा में आगे आने की दोड़ भी तनाव के विशेष कारण है.
आप जितने ज्यादा पारिवारिक सामाजिक राजनेतिक सूचना से जुड़े होंगे आप उतने तनावग्रस्त होंगे. अतः अपनी सूचना को सीमित करें, अकारण चिंता को छोड़ें, ज्यादा प्रतियोगी न बने.जीवन और सेवा में आगे आने की दोड़ से बचें. यह समझ लें कि दुनिया आपके बिना भी चलेगी.
बोरियत से बचें और कोई ceatvity पालें. खेल, पशु-पक्षी पालन, सेवा कार्य और दूसरे की मदद तनाव दूर करता है.
जगत का अस्तित्व नहीं रहता.