Saturday, 17 December 2011

सत् असत् - Prof.Basant


               सत् असत्

सत् का अर्थ है जो नित्य है, सदा है, एक सा रहता है, जो पहले भी था आज भी है और कल भी रहेगा. किसी भी परिस्थिति में उसमें परिवर्तन नहीं होता है. वह निश्चित है. इसलिए परमात्मा को सत् कहा गया.
लोग असत् का अर्थ झूठ समझते हैं परन्तु वेदान्त और दर्शन ग्रंथों में असत् माया, भ्रम, अज्ञान, जड़ के लिए प्रयुक्त हुआ है. असत् का अर्थ है जो आज है, अभी है पर कुछ देर बाद या कल नहीं है. संसार को इस कारण असत् कहा गया क्योंकि संसार अथवा पदार्थ नित्य नहीं हैं वह सदा विनष्ट होते रहते हैं.
शंकराचार्य का कथन
ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या
इसी सत् असत् को सूत्र बद्ध करता है. इस विषय में यह भी महत्वपूर्ण है कि जगत का प्रत्येक परमाणु सत् का विस्तार है परन्तु परमाणु या जगत सत् नहीं है परमाणु का अनादि कारण सत् है अर्थात जिसके कारण परमाणु की सत्ता है वह सत् है. यदि गहराई से जानें तो असत् है ही नहीं. अज्ञान अथवा भ्रम से असत् का बोध होता है.

श्री भगवान भगवद्गीता के दूसरे अध्याय के सोलहवें श्लोक में कहते हैं

असत् की सत्ता नहीं सत् का नहीं अभाव
तत्व ज्ञानी जानता इनका विषय विचार ।। 16।।

सृष्टि का मूल तत्व सत् है, वही नित्य है, सदा हैअसत् जिसे जड़ या माया कहते हैं, यह वास्तव में है ही नहींजब तक पूर्ण ज्ञान नहीं हो जाता तब तक सत् और असत् अलग अलग दिखायी देते हैंज्ञान होने पर असत् का लोप हो जाता है वह ब्रह्म में तिरोहित हो जाता हैउस समय दृष्टा रहता है   दृश्यकेवल आत्मतत्व जो नित्य है, सत्य है, सदा है, वही रहता है

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Thursday, 8 December 2011

ज्ञान का विज्ञान –Prof. Joshi Basant


                          ज्ञान का विज्ञान

ज्ञान के 10 धरातल हैं और आधुनिक विज्ञान केवल पांच ज्ञान के धरतालों को सीमित रूप में जान पाया है. शेष ज्ञान के धरतालों को बुद्धि के धरातल से महाबुद्धि को जाग्रत कर ही जाना जा सकता है.
1.परम ज्ञान-इसे शब्दों में नहीं बताया जा सकता है, यह अव्यक्त स्थिति है.इसे absolute knowledge+wisdom+intelligence कह सकते हैं.
2.प्राज्ञ ज्ञान- ज्ञान शान्त रूप से स्थित केवल आनन्द स्वरूप.
3.तेजस ज्ञान-स्वप्नवत ज्ञान
4.वैश्वानर ज्ञान-जाग्रत ज्ञान
ज्ञान के जाग्रत होने पर चेतना के धरातल का प्रारंभ होता है.
5.धृति जिस ज्ञान के द्वारा जड़ और चेतन का संयोग बना रहता है.
6.अभिमानात्मिक ज्ञान- इसे अहँकार कहते हैं.
7.स्मरणात्मिक ज्ञान- यह चित्त की स्मृति को रखने वाली वृत्ति है
8.निश्चयात्मक ज्ञान- अन्तःकरण की यह वृत्ति बुद्धि है.
9.संशयात्मक ज्ञान- मन
6,7,8,9 CNS के function हैं.
10.अज्ञान ज्ञान की सभी अवस्थाएँ बीज रूप में.-जड़त्व
1.परम ज्ञान

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