Tuesday, 2 August 2011

कल्कि अवतार-मुहम्मद और हिन्दू धर्म ग्रन्थ


अल्लोपनिषद्- आइने  में केवल सच ही सच
इतिहासकारों के अनुसार
अल्लोपनिषद अकबर के समय में लिखा गया ग्रन्थ  है जिसे जान बूझ कर  अथर्ववेद के साथ जोड़ दिया गया. पवित्र वेदों में इस्लाम, मुहम्मद, कुरान का कोई जिक्र नहीं है. अकबर का जन्म 1542 AD में हुआ. मुहम्मद का जन्म 570 AD है. वेदों का समय काल 1500 BC से 600 BC  है. यह काल निर्धारण वैज्ञानिक और प्रामाणिक है. अल्लोपनिषद की तरह कुछ अन्य क्षेपक (inserted text) भी  मिलते हैं जो मुग़ल काल की देन हैं. भविष्य पुराण का समय 50BC से 1850 AD तक माना गया है. मुग़ल काल में इसमें इस्लाम और मुहम्मद से सम्बंधित श्लोक आदि जोड़े गए. अकबर का दीन इलाही (mixture of hindu and islam) भी इन क्षेपकों का प्रमुख कारण रहा है. भाषा इनमें अंतर स्पष्ट करती है.
संस्कृत संसार की सबसे प्राचीन भाषा है. इसमें अल्ला शब्द है, जिसका अर्थ होता है पराशक्ति. कालांतर में यह शब्द अरबी भाषा में ले लिया गया. संस्कृत का आभार .
          हिंदू सृष्टि के कण कण में  परमात्मा को मानते हैं, हिदुओं में ईश्वर की खोज हुई है अतः वृक्ष पूजन से लेकर सर्वशक्तिमान परमात्मा की खोज फिर उसको कण कण में देखना, सभी जड़ चेतन में उसे अनुभूत करना हिन्दू धर्म की विशेषता है. इसके अलावा उस अव्यक्त, अक्षर (shapeless,bodyless)को अनुभूत कर, समझकर उससे प्रेम करना उसके कोई भी मूर्त रूप (विग्रह} का पूजन बड़ी उच्च सोच का परिणाम है. सब में ईश अनुभूति ज्ञान और चेतना के उच्च स्तर की बातें हैं जिन्हेँ पड़कर नहीं बल्कि अनुभूति द्वारा समझा जा सकता है. यह जीवन विकास के अति उच्च स्तर की सोच और समझ है.

हिंदू सब प्राणियों के कल्याण की कामना करता है.
यही नहीं  प्रतिदिन  प्रातः ईश पूजा में वह कहता है.....

अंतरिक्ष में शान्ति हो वह तुम्हारे लिए अनुकूल हो
वायु में शान्ति हो वह तुम्हारे लिए अनुकूल हो
अग्नि में शान्ति हो वह तुम्हारे लिए अनुकूल हो
ल में शान्ति हो वह तुम्हारे लिए अनुकूल हो
पृथ्वी में शान्ति हो वह तुम्हारे लिए अनुकूल हो 

परमात्मा सब पर कृपा करें.

कई लेखक ,ब्लोगेर्स अल्लोपनिषद. इस्लाम, मोहम्मद, पैगम्बर आदि आदि नामों से हिन्दू धर्म के विषय में अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं. नाम दे रहे हैं भाई  चारा. लिखने से पहले क्या लिख रहे हो जान लो. कृपया पड़े लिखे लोगों को कुतर्कों और अप्रमाणिक तथ्यों से गुमराह न करें. हिन्दू भी अपने धर्म ग्रंथों को पड़े.  हिन्दू जानता है पौराणिक कहानी धर्म नहीं है, उसका सार धर्म है. वह कथा चाहे सत्य हो अथवा काल्पनिक, प्रतीकात्मक है. इसी प्रकार मूर्ती ईश्वर नहीं है, हमारा प्रेम उस मूर्ती, चित्र में प्राण प्रतिष्ठित करता है. उससे परमात्मा के प्रति भाव, प्रेम जागता है. वह हमारी आत्मा में समां जाता है. कर के देखो खुद समझ में आ जायेगा. यही मुसलमान भी समझें.
जानो कण कण में भगवान.
दूसरे के प्रति अपशब्द सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान का अपमान है.
हिन्दुओं की धार्मिक सोच अन्य सोचों से कई हजार वर्ष आगे है. यही भविष्य की सोच होगी.  

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